Author: Alok singhai

  • टोल से शीघ्र मिलेगी राहत:गडकरी

    टोल से शीघ्र मिलेगी राहत:गडकरी


    नई दिल्ली,(ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि जल्दी ही हम ऐसी स्कीम जारी करने जा रहे हैं, जिससे टोल को लेकर लोगों की कोई तकरार नहीं होगी. जो भी हम ऐलान करेंगे, उससे लोगों की दिक्कत दूर हो जाएगी.


    कहीं घूमने जा रहे हो या ऑफिस विजिट का प्लान हो, हर 20-25 किलोमीटर के दायरे में आने वाला टोल और उसकी महंगी फीस हर किसी का दम निकाल देते हैं. हालांकि, अब इस टोल सिस्टम में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है. इसका ऐलान खुद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक टीवी न्यूज चैनल पर किया. उनका कहना है कि सिर्फ तीन दिन में टोल को लेकर बड़ा फैसला होने वाला है. इसके बाद कोई भी उन्हें टोल मंत्री कहकर ट्रोल नहीं कर पाएगा. टोल सिस्टम में क्या बदलाव होगा? क्या नया सिस्टम आ सकता है? अभी किस हिसाब से लगती है फीस? आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ.
    गौरतलब है कि एक नेशनल न्यूज चैनल पर नितिन गडकरी ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया. टीवी एंकर ने उनसे पूछा कि आपके काम की जितनी तारीफ होती है तो टोल मंत्री के रूप में भी आपके काफी ज्यादा मीम्स बनते हैं. मौजूदा वक्त में अगर किसी के सबसे ज्यादा मीम्स बनते हैं तो वह आप हैं. पब्लिक जानना चाहती है कि टोल पर इतने पैसे क्यों वसूले जाते हैं? इस पर नितिन गडकरी ने कहा, ‘पूरी तैयारी हो चुकी है. आज ही मैं आया हूं. दो-चार दिन में हम ऐलान कर देंगे. टोल के बारे में कोई तकलीफ नहीं होगी. मैं ऐसी योजना जाहिर कर रहा हूं, जिससे लोगों को राहत मिलेगी. इससे ज्यादा मैं तीन दिन के बाद खुलासा करूंगा. तब तक नोटिफिकेशन आएगा, उस पर मैं साइन करूंगा और ऐलान कर दूंगा.’


    टीवी एंकर ने पूछा कि क्या मैं अपने करोड़ों दर्शकों को यह बता दूं कि टोल फ्री होने वाला है? या टोल पर कितने फीसदी की छूट मिलने वाली है? इस पर नितिन गडकरी ने कहा कि मैं ऐसा कोई ऐलान नहीं कर रहा हूं. मैं बस इतना कह रहा हूं कि तीन दिन के अंदर हम ऐसी स्कीम जारी करने जा रहे हैं, जिससे टोल को लेकर लोगों की कोई तकरार नहीं होगी. जो भी हम ऐलान करेंगे, उससे लोगों की दिक्कत दूर हो जाएगी. तीन दिन के बाद कोई मुझे ट्रोल ही नहीं करेगा.


    नितिन गडकरी के इस बयान के बाद टोल फीस को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर लाइन में नहीं लगना होगा. अब आप अपनी गाड़ी से जितना सफर करेंगे, उतना टोल अपनेआप बैंक खाते से कट जाएगा. कहा जा रहा है कि यह पूरा सिस्टम डिजिटली ऑपरेट होगा. इसके लिए किसी को भी टोल प्लाजा पर जाम में फंसकर वक्त बर्बाद नहीं करना होगा.
    यह भी कहा जा रहा है कि सरकार जल्द ही लाइफटाइम टोल पास लाने को लेकर प्लानिंग कर रही है. इसके लिए प्राइवेट कार यूजर्स को कार की उम्र यानी 15 साल के लिए लाइफटाइम टोल पास बनवाने का विकल्प मिल जाएगा, जिसकी कीमत करीब 30 हजार रुपये मानी जा रही है. इसके बाद उन्हें हर तरह के टोल प्लाजा पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी. अब टोल पर सरकार का क्या प्लान है, इसका खुलासा तीन दिन बाद होने की उम्मीद है.


    फिलहाल, देश में हाईवे पर करीब 20 से 30 किलोमीटर के दायरे में टोल प्लाजा बने हुए हैं. एक्सप्रेसवे पर यह दूरी ज्यादा है, लेकिन थोड़ा सफर करने के बाद टोल फीस देनी पड़ती है, जिसका भुगतान फास्टैग से लिया जाता है. टोल प्लाजा का सर्वर डाउन होने या भीड़ ज्यादा होने पर लोगों को जाम में फंसना पड़ता है. माना जा रहा है कि सरकार का नया कदम लोगों को राहत दे सकता है.

  • अनफिट वाहन स्क्रैप कराने में ज्यादा फायदा

    अनफिट वाहन स्क्रैप कराने में ज्यादा फायदा


    नई दिल्ली(ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन मालिकों को पुराने, अनफिट और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने को प्रोत्साहित करने के लिए, वाहन स्क्रैपिंग नीति के तहत, गैर-परिवहन वाहनों के मामले में मोटर वाहन कर में 25 प्रतिशत तक और ‘जमा प्रमाणपत्र’ देने पर खरीदे गए परिवहन वाहनों के मामले में 15 प्रतिशत तक की रियायत प्रदान करने के बारे में 5 अक्टूबर, 2021 को जीएसआर 720 (ई) अधिसूचना जारी की है।
    दिनांक 04.10.2021 को जारी जीएसआर 714(ई) में प्रावधान है कि यदि वाहन का पंजीकरण ‘जमा प्रमाणपत्र’ देने पर होता है, तो पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
    दिनांक 23.09.2021 को जारी जीएसआर 653 (ई) (समय-समय पर संशोधित) के माध्यम से जारी किए गए मोटर वाहन (पंजीकरण और वाहन स्क्रैपिंग सुविधा के कार्य) नियम, 2021 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाएं (आरवीएसएफ) स्थापित करने के लिए नियम प्रदान करते हैं।
    उपर्युक्त नियमों के नियम 10 के उप-नियम (xix) में यह प्रावधान है कि आरवीएसएफ यह सुनिश्चित करेगा कि स्क्रैप किए गए वाहन के खतरनाक भागों को हटाने या पुनः चक्रित करने या निपटान का कार्य तथा ऐसे वाहनों जिनका जीवन समाप्‍त हो चुका है, का पर्यावरण की दृष्टि से उचित प्रबंधन केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और एआईएस-129 के अनुसार किया जाए।
    इन नियमों के नियम 14 के अनुसार, पंजीकृत स्क्रैपर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 126 के तहत निर्दिष्ट किसी भी एजेंसी से वार्षिक विनियामक और अनुपालन ऑडिट और आरवीएसएफ के द्रव्यमान प्रवाह विवरण का ऑडिट कराना आवश्यक है।
    सीपीसीबी ने मार्च, 2023 में ऐसे वाहनों, जिनका जीवन समाप्‍त हो चुका है, के संचालन और स्क्रैपिंग के लिए पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल सुविधाएं स्‍थापित करने के लिए दिशानिर्देश प्रकाशित किए हैं।
    पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिनांक 30.01.2024 को एसओ 367 (ई) के माध्यम से जीवन-काल समाप्त कर चुके वाहन (प्रबंधन) नियम, 2024 को अधिसूचित किया है। ये नियम विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (ईपीआर) का एक ढांचा प्रदान करते हैं, जिसमें वाहनों के निर्माता (आयातकर्ताओं सहित) आरवीएसएफ में जीवन-काल समाप्त कर चुके वाहनों को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
    वाहन स्क्रैपिंग नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक स्क्रैपिंग प्रक्रिया के जरिए पर्यावरण अनुकूल तरीके से पुराने और अनफिट वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। जीएसआर 653 (ई) (समय-समय पर संशोधित) के तहत जारी अधिसूचना में प्रावधान है कि असंगठित/अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक स्क्रैपिंग इकोसिस्‍टम के साथ एकीकृत किया जाए। अब तक स्थापित 62 आरवीएसएफ में से 22 पूर्व अनौपचारिक स्क्रैपर्स द्वारा स्थापित किए गए हैं।
    यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

  • नितिन गड़करी ने रखी सड़क परिवहन के आधुनिकीकरण की नींव

    नितिन गड़करी ने रखी सड़क परिवहन के आधुनिकीकरण की नींव

    नई दिल्ली( ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)। श्री नितिन गड़करी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। श्री अजय टम्टा और श्री हर्ष मल्होत्रा ने भी उनके साथ राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। श्री गड़करी ने मोदी 3.0 में इस भूमिका को फिर से सौंपने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत में तेजी से विश्वस्तरीय और आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास होगा।

  • ट्रक ट्रांसपोर्ट ओनर वेलफेयर आर्गेनाईजेशन ने विमान दुर्घटना में मृत लोगों के प्रति अर्पित की श्रद्धांजलि

    ट्रक ट्रांसपोर्ट ओनर वेलफेयर आर्गेनाईजेशन ने विमान दुर्घटना में मृत लोगों के प्रति अर्पित की श्रद्धांजलि


    भोपाल, 16 जून (ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)। ट्रक ट्रांसपोर्ट ओनर वेलफेयर आर्गेनाईजेशन ने अहमदाबाद विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले यात्रियों और छात्रों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। एयर इंडिया का यह AI-171 बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान विगत 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रहा था। विमान दुर्घटना में यात्रियों और छात्रों समेत 279 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
    आर्गेनाईजेशन के सचिव विनोद जैन एमपीटी ने बताया कि ये विमान दुर्घटना इतनी अप्रत्याशित थी कि जिस पर विमान के चालक और अन्य कोई भी लोग नियंत्रण नहीं कर सके थे। निर्दोष यात्रियों के साथ मेडीकल कालेज के छात्रों का भी असामयिक निधन हृदय विदारक था। उन्होंने बताया कि ट्रक ओनर वेलफेयर आर्गेनाईजेशन ने अपनी आमसभा में दो मिनिट का मौन रखकर मृत आत्माओं के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
    आर्गेनाईजेशन ने ट्रक ट्रांसपोर्ट कारोबार में आ रहीं विभिन्न रुकावटों को दूर करने और नागरिकों को सुरक्षित परिवहन मुहैया कराने के विषय पर चर्चा की। बैठक में भोपाल के सभी प्रमुख ट्रक ट्रांसपोर्ट व्यवसाई व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। इनमें संस्था के अध्यक्ष सर्व श्री कमल पंजवानी, उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष गोपेन्द्र मालपानी, सह संयोजक राजेन्द्र गोयनका, दिनेश कुमार जैन, ठाकुर लाल राजपूत, समेत संस्था के सभी पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
    इस बैठक में आर्गेनाईजेशन के कार्यकलापों को बल देने की कार्ययोजना बनाई गई। इन कार्यों को एक सूत्र में पिरोने के लिए आलोक सिंघई को कार्यालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। संस्था की ओर से भविष्य में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। ट्रांसपोर्ट कारोबार को एक वृहद मंच उपलब्ध कराने और शासन की ओर से आने वाली रुकावटों का समाधान करने पर जोर दिया जाएगा। संस्था की ओर से न केवल ट्रक व्यवसाय बल्कि बस कारोबार, विमान उड्डयन, कार टैक्सी कारोबार को भी व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाएगा । मध्यप्रदेश की ट्रांसपोर्ट गतिविधियों को एक मंच पर लाकर राज्य की परिवहन व्यवस्था को मजबूती प्रदान की जाएगी।

  • Transport Department Madhyapradesh E Sewa

    Transport Department Madhyapradesh E Sewa

    http://mis.mptransport.org/MPLogin/eLogin.aspx
  • कारोबारी समझ ने ओम लाजिस्टिक को दी ऊंचाई

    कारोबारी समझ ने ओम लाजिस्टिक को दी ऊंचाई


    नई दिल्ली( ट्रासपोर्ट रिपोर्टर)। अजय सिंघल ने 1982 में दिल्ली के पंजाबी बाग में एक छोटे से ऑफिस और एक ट्रक से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय की शुरुआत थी। उनके प्रयासों से यह व्यवसाय बढ़कर 2,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के टर्नओवर वाला ओम लॉजिस्टिक्स ग्रुप बन गया।
    अजय सिंघल देश के सफल कारोबारी हैं। 1982 में उन्‍होंने अपने चाचा के साथ मिलकर दिल्ली के पंजाबी बाग में एक कमरे के ऑफिस से एक ट्रक के साथ ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय शुरू किया था। आज वही 2,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले ओम लॉजिस्टिक्स ग्रुप में बदल चुका है। इसमें 5,000 से ज्‍यादा लोग काम करते हैं। इसके पास 5,000 से अधिक ट्रक हैं। ग्रुप का सालाना टर्नओवर 2,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का है। कंपनी ऑटोमोबाइल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग व्यवसाय में है। आइए, यहां अजय सिंघल की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
    अजय सिंघल ओम लॉजिस्टिक्स ग्रुप के संस्थापक हैं। उन्‍होंने 1982 में इसकी नींव रखी थी। दिल्‍ली के पंजाबी बाग में छोटे से ऑफिस से इसकी शुरुआत हुई थी। अब यह करोड़ों के टर्नओवर वाली कंपनी बन चुकी है। यह ऑटोमोबाइल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग व्यवसाय में है। 1983 में मारुति सुजुकी को इसने अपना पहला बड़ा ग्राहक बनाया था। यहां से अजय सिंघल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्‍होंने नई तकनीकों में निवेश किया और इनोवेशन को अपनाया। इससे उन्हें बाजार में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिली। मारुति कारों की डिलीवरी ट्रक में करने वाले वह पहले व्यक्ति थे।
    अजय रोहतक गवर्नमेंट कॉलेज से प्री-इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक हैं। 1983 में उन्‍हें क्‍लाइंट के तौर पर मारुति मिली। इसका प्लांट गुड़गांव में था। उनका ट्रक पांच कारों को एक के ऊपर एक दो पंक्तियों में रखकर ले जाने में सक्षम था। उन्होंने इंजीनियरिंग के ज्ञान का इस्‍तेमाल करके ट्रक को मॉडिफाई किया था। डिप्लोमा के बाद अजय ने इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं ली। लेकिन, 18 साल की उम्र में दिल्ली के बाहरी इलाके वजीराबाद में रेडियो पार्ट्स बनाने की फैक्ट्री शुरू करने के लिए अपने एक चाचा के साथ जुड़ गए।
    अजय ने 3,000 रुपये से रेडियो पार्ट्स बनाने की फैक्‍ट्री की शुरुआत की। चार साल तक व्यवसाय चलाया। उस दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय में शाम की क्‍लासेज लेकर बी.कॉम भी किया। बाद में अपने व्यवसाय को 60,000 रुपये में बेच दिया। इसके बाद अजय दूसरे चाचा के साथ ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय शुरू करने के लिए जुड़ गए। शुरुआती वर्षों में वह बहुत सक्रिय थे। लॉजिस्टिक्स व्यवसाय के हर पहलू पर काम करते थे। हर कदम का बारीकी से ध्यान रखते थे। चाहे वह माल की बुकिंग हो, बिलिंग हो या सेवाओं की समयबद्धता और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना हो।
    अजय ने ट्रकों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाना जारी रखा। स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके वह 2 लाख रुपये में एक ट्रक बना सकते थे जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में 20 लाख रुपये में उपलब्ध था। जबकि अन्य ट्रक दिल्ली से मुंबई तक माल पहुंचाने के लिए 3,000 रुपये लेते थे, वह इसे 1,200 रुपये में कर सकते थे।। व्यवसाय अच्छा चला। लेकिन, 1990 तक चाचा और भतीजे ने अलग होने और अपने-अपने रास्ते जाने का फैसला कर लिया। वह 15 ट्रक लेकर अलग हो गए। उन्‍होंने अपनी फर्म ‘ओम ऑटो कैरियर्स’ को प्रोपराइटरशिप फर्म के रूप में पंजीकृत किया। 1993 में यह ओम लॉजिस्टिक्स (अनलिस्टेड) लिमिटेड बन गई। ओम लॉजिस्टिक्स ने देशभर में गोदाम बनाए हैं। मारुति और बजाज के बाद उन्होंने टाटा को भी अपने साथ जोड़ा। 2002 तक उनका टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ओम लॉजिस्टिक्स ने 2002 में अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स में प्रवेश किया जब मारुति को चीन से स्पेयर पार्ट्स आयात करने की जरूरत थी। 2008 तक कंपनी का टर्नओवर 500 करोड़ रुपये और 2015 में 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

  • NHAI ने अवैध टोल वसूलने वाली 14 एजेंसियों की जमानत राशि छुड़ाई

    NHAI ने अवैध टोल वसूलने वाली 14 एजेंसियों की जमानत राशि छुड़ाई


    भोपाल, 16 जून( ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)। सड़क से लेकर संसद तक गूंजे टोल घोटाले में टोल वसूलने के लिए अनुबंधित 14 एजेंसियों पर कार्रवाई की गई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने जिम्मेदार एजेंसियों को दो वर्ष के लिए प्रतिबंधित करने के साथ ही अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के कारण उनकी लगभग 100 करोड़ रुपये जमानत राशि भी जब्त कर ली है।
    टोल संग्रह की व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के सरकार के दावे को उस समय झटका लगा, जब यूपी एसटीएफ ने मीरजापुर के अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर छापा मारा। तब आरोप लगा कि देश के लगभग 42 टोल प्लाजा पर अवैध टोल वसूली का खेल चल रहा था और सरकार को उससे 120 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया गया।
    टोल प्लाजा पर बिना फास्टैग या प्रतिबंधित फास्टैग वाले वाहनों से संग्रहण के अनुबंधित एजेंसियों के कर्मी फर्जी सॉफ्टवेयर से अवैध वसूली कर रहे थे। मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इस मामले में चली कानूनी कार्रवाई के साथ ही सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
    सरकार का दावा है कि रिपोर्ट में सामने आया है कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम में कोई खामी नहीं पाई गई है। 98 प्रतिशत टोल संग्रह ईटीसी सिस्टम से ही हुआ है। चूंकि, कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब टोल संग्रह एजेंसियां नहीं दे सकी हैं, इसलिए एनएचएआई ने उन पर कार्रवाई करते हुए दो वर्ष के लिए प्रतिबंधित करते हुए जमानत राशि भी जब्त कर ली है।
    अब इन टोल प्लाजा पर टोल संग्रह का काम नई एजेंसियों को सौंपने को कहा गया है। इसके साथ ही मंत्रालय ने संसद में जानकारी दी है कि सटीक आंकड़ा जुटाने के लिए प्रमुख (हाई वैल्यू) टोल प्लाजा पर एआई का उपयोग करते हुए ऑडिट कैमरे भी लगाए जाने पर विचार किया जा रहा है।
    सरकार की ओर से संसद में यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर गलत टोल संग्रह के लिए 2024 में 12.55 लाख रुपये रिफंड किए गए। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि गलत टोल संग्रह के मामलों में संबंधित एजेंसियों पर अब तक दो करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है।
    नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा गलत टोल संग्रह किए जाने की सूचना दी थी। ऐसे कुल 410 करोड़ फास्टैग लेनदेन थे, जो सभी फास्टैग लेनदेन का 0.03 प्रतिशत है।
    मंत्री ने बताया कि अगर टोल एजेंसियां गलत यूजर चार्ज वसूलने की जिम्मेदार पाई जाती हैं तो अनुबंध के अनुसार उस अतिरिक्त यूजर चार्ज पर 30-50 गुना जुर्माना लगाया जाता है। दरअसल, कभी-कभी वाहनों से राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर यात्रा किए बिना भी टोल शुल्क वसूल लिया जाता है।
    ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि एजेंसियां मैन्युअल रूप से वीआरएन-आधारित लेनदेन बनाते समय सिस्टम में गलत वाहन पंजीकरण संख्या (वीआरएन) दर्ज कर देती हैं। कभी-कभी फास्टैग रीडर द्वारा कई बार रीडिंग लेने के कारण दोगुना शुल्क ले लिया जाता है।